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शिक्षा के लिए किसकी सरकार बेहतर है और क्यों?

शिक्षा के लिए किसकी सरकार बेहतर है : आरटीआई रिपोर्ट से हुआ खुलासा
देश की आजादी से लेकर अब तक तमाम राजनीतिक संगठनों ने सत्ता हासिल की और समय-समय पर सभी राजनीतिक संगठन दावा करते रहे कि उनकी सरकार शिक्षा के लिए रणनीतियों के तहत नई दिशा दी है |जब डॉ अनिल कुमार ने केंद्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा की जांच पड़ताल सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना मांगी गई तो सामने आया कि शिक्षा जगत का स्वर्ण काल किसके शासनकाल में अच्छा रहा| आरटीआई रिपोर्ट में 28 अगस्त 2018 तक देश में 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ है |
शिक्षा


रिपोर्ट में साफ साफ सामने आया कि कांग्रेस के शासनकाल में 38 केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ तथा भारतीय जनता पार्टी के 10 वर्षों के कार्यकाल में दो केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ | पिछले कुछ वर्षों के भारतीय अर्थव्यवस्था के बजट का समीक्षात्मक अवलोकन करने पर पाया कि साल 2012-13 में शिक्षा क्षेत्र पर जीडीपी का 3.1%, 2014-15 में 2.8%, 2015-16 में 2.4% पर खर्च हुआ | 2016-17 और 2017-18 में यह आंकड़ा 2.7% पर आ गया है। दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के सह संयोजक डॉ अनिल कुमार ने देश के शिक्षा के गिरते हुए शिक्षा के हालातों पर सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं कहा है कि देश में सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली काफी कमजोर है और खराब बुनियादी, सुविधाओं, खाली शिक्षण पदों शिक्षकों का गैर शैक्षणिक कार्यों मे संलग्न होना और शिक्षण प्रशिक्षण संस्थानों से संबन्धित विभिन्न मुद्दों से जूझ रही है।
सरकार के बजट आंकड़ों के अनुसार स्कूली शिक्षा में पिछले छह वर्षों के दौरान 39,000 करोड़ रुपये यानी 3 फीसदी की गिरावट देखी गई है।
सरकार ने देश में बुनियादी शिक्षा व्यवस्था के ढांचे को मजबूत करने के लिए अनेक घोषणाएं की लेकिन अधिकांश योजनाएं सरकारी कागजों पर सिमट कर रह गई है उनका कोई जमीनी धरातल पर कोई सरोकार नहीं है | जिनमें मध्य प्रदेश में जय प्रकाश नारायण नेशनल सेंटर फॉर एक्सिलेंस इन ह्यूमनिटीज, मुंबई में नेशनल सेंटर फॉर एक्सिलेंस इन गेमिंग एंड स्पेशल इफेक्ट्स आदिवासी बहुल इलाकों के लिए नवोदय विद्यालय की तर्ज पर आवासीय एकलव्य विद्यालय के स्थापना, 2017 के वित्त बजट 62 नए नवोदय विद्यालयों की स्थापना एवं 5000 सीटें 2019-20 सत्र में बढ़ाने की घोषणा हुई लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। हालांकि सरकार ने 2019 के बजट में शिक्षा क्षेत्र में 83,626 करोड़ रुपये आवंटित किए लेकिन उसमें से 3,411 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुआ | शिक्षा जगत के उच्च शिक्षण संस्थानों को ऋण उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से वर्ष 2017 में सरकार ने केंद्रीय संस्थानों के आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए हायर एजुकेशन फाइनांसिंग एजेंसी (HEFA)की स्थापना की | कुछ समय पश्चात ही सरकार ने बजट में 650 करोड रुपए की कटौती कर दी, जो पिछले वर्ष 2750 करोड़ रुपये था जिसे घटाकर 2100 करोड़ रुपये कर कर दिया। पिछले कुछ वर्षों से लगातार सरकार का शिक्षा के प्रति नकारात्मक रवैया ने देश के कई संस्थानों के अस्तित्व को खतरे में आने से अनेक चुनौतियां खड़ी हो गई है |
डॉ अनिल कुमार




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