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प्रधानमंत्री ने उज्ज्वला योजना की घोषणा तो की लेकिन बजट आवंटित नहीं हुआ : RTI रिपोर्ट से हुआ खुलासा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई 2015 को उन्नत ज्योति बाय अफॉर्डेबल एल.ई. डी फोर ऑल ( उज्ज्वला  योजना की घोषणा की ! उज्ज्वल कार्यक्रम को 11 मार्च 2016 से पहले घरेलू दक्षता प्रकाश कार्यक्रम के रूप में जाना जाता था जिसे बाद में उज्ज्वला
और स्ट्रीट लाइट नेशनल प्रोग्राम के नाम से जाना जाने लगा ! इस योजना के अंतर्गत कम मूल्य पर सरकार एल.ई. डी बल्ब उपलब्ध करवाएगी ताकि बिजली की बचत की जा सके!परंपरागत बल्बों के इस्तेमाल से बिजली अधिक खर्च होता है, इसके समाधान के लिए एल.ई. डी बल्ब के इस्तेमाल पर सरकार जोर देगी !

सरकार ने इस योजना को प्रचारित प्रसारित करने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए ! लेकिन जब दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के सह संयोजक डॉ अनिल कुमार ने इस योजना की कार्यप्रणाली की सत्यता को जानने के लिए सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सरकार से सूचना मांगी तो दिनांक 13 अगस्त 2018 को एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड द्वारा रिपोर्ट में सामने आया कि इस योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के 77 करोड़ बल्ब की जगह एल.ई.डी बल्ब से बदलने का लक्ष्य रखा गया ! रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्ट्रीट लाइट नेशनल प्रोग्राम ने इस योजना का लक्ष्य मार्च 2019 तक 1.34 करोड पारंपरिक व पुरानी स्ट्रीट लाइट की जगह पर एलइडी लगाने का लक्ष्य रखा गया ! आरटीआई रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार ने अब तक उजाला और स्ट्रीट लाइट कार्यक्रम के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया है ! डॉ अनिल कुमार ने सरकार द्वारा घोषणा की गई

योजनाओं पर निष्क्रियता पर अनेक सवाल खड़े किए हैं – सरकार सिर्फ योजनाओं की घोषणा करने में एवं योजना को प्रचारित प्रसारित करने में विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च करने में ही सक्रियता दिखाती है लेकिन जमीनी धरातल पर योजनाओं पर निष्क्रिय प्रदर्शन ही किया हैै ! सरकार ने अनेकों ऐसी योजनाओं की घोषणा कर रखी है जिन पर अब तक कोई सरकारी बजट आवंटित नहीं हुआ है ! अधिकांश योजनाएं घोषणा के बाद ठंडे बस्ते में चली गई है ! यदि सरकार किसी घोषणा को पूरा करने में समर्थ नहीं है तो सरकार ऐसी योजनाओं की घोषणा कर देश के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ क्यों कर रही है ! साथ साथ यह भी कहा कि सरकार ने अधिकांश रुपए योजनाओं को प्रचारित प्रसारित करने में खर्च कर दिए हैं और देश के बड़े उद्योगपतियों से दोस्ती निभाने के चक्कर में सरकारी खजाने में रुपए नहीं बचे होने के कारण इन योजनाओं पर बजट आवंटित नहीं हुआ !




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