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बीजेपी भारत के आधुनिकरण के खिलाफ ; रूढ़िवादिता, सांप्रदायिकता के दहशत में उलझा कर रखना चाहती है क्या लोगों को

बीजेपी भारत के आधुनिकरण के खिलाफ

भारत भले ही 1947 में आजाद हो गया है ! इस आजादी के सफर को तय करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों का बहुत बड़ा संघर्ष और त्याग जुड़ा हुआ है ! लोगों में राष्ट्रीयता की भावना तब तब जोर पकड़ने लगी जब जब विदेशी विदेशी ताकतों का अन्याय एवं शोषण की भावनाएं प्रबल होती चली गई थी ! उस स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष में देश में कुछ ऐसी ताकतें भी थी जो ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी को स्वीकार रखना चाहती थी ! उस विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले लोगों में नाथूराम गोडसे वीर सावरकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे लोग संबंध रखते थे ! भारत की गुलामी का यह लोग इसलिए समर्थन करते थे क्योंकि ब्रिटिश हुकूमत ने बिना किसी मेहनत के इनको तमाम तरह के संसाधन सुविधाओं से नवाज रखा था ! यह लोग इस बात को भी भली-भांति जानते थे जैसे ही ब्रिटिश हुकूमत से देश आजाद हो जाएगा तब इनको मिलने वाली सुख सुविधाओं का क्या होगा ? इस चिंता के कारण इस विचारधारा के लोगों ने कभी भी भारत की आजादी का समर्थन नहीं किया एवं अंग्रेजों की अधीनता में जीने का निश्चय किया ! फिलहाल देश में भारत की आजादी का विरोध करने वाले परंपरा के लोग सत्ता की सियासत पर काबिज है ! यह वही विचारधारा है जो शोषक वर्ग की स्वार्थों की पूर्ति के लिए बहुसंख्यक वर्ग के शोषण के लिए हमेशा तत्परता दिखाती है !
विदेशी हुकूमत के समय किसानों से अत्यधिक मात्रा में कर वसूल करने वाली व्यवस्था को मोदी सरकार ने फिर से पूंजीपतियों की व्यवस्था को देश में पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है !
इतिहास इस बात का साक्षी है शोषक वर्ग के शोषण के जिम्मेदार पूंजीवादी जिसे प्राचीन समय में जमीदारी प्रथा या सामंतवाद के नाम से जाना जाता था ! भारतीय जनता पार्टी का यदि हम 11 वर्ष से अधिक सियासत का कार्यकाल देखें तो यह बात हम भली-भांति समझ पाएंगे इनकी अधिकांशत योजनाएं उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की रही है ! उदाहरण के लिए फिलहाल हम मुकेश अंबानी की जिओ कंपनी को देख सकते हैं ! उस को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने भारत की सार्वजनिक कंपनी बीएसएनल को नुकसान पहुंचाकर 54 हजार से अधिक कर्मचारियों को बेरोजगारी के दलदल में धकेल दिया !
दूसरे उदाहरण के तौर पर नोटबंदी की खुली लूट में कुछ गिने-चुने पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का काम किया है ! जिसके परिणाम स्वरूप देश की बेरोजगारी की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत से अधिक हो गई ! जिसके कारण देश के युवाओं को रोजगार मिलने के बजाय करोड़ों रोजगार चले गए ! तीसरे उदाहरण के तौर पर हम लगातार शिक्षा का बढ़ता हुआ निजी करण को देख सकते हैं जो कि सीधे-सीधे पूंजीपतियों की कठपुतली बनती जा रही है ! जिसका आगे परिणाम यह होगा की जो आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए समुदाय से संबंध रखते हैं उनके लिए हमेशा के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद हो जाएंगे ! चौथे उदाहरण के तौर पर कर्ज के अभाव में आत्महत्या करते हुए किसानों की दुर्दशा देख सकते हैं ! जहां किसान खेती के लिए कर्ज नहीं मिलता लेकिन पूंजीपतियों का प्रधानमंत्री ने लगातार करोड़ों अरबों रुपए माफ किए हैं ! और कुछ गिने-चुने लोगों को देश का करोड़ों रुपए लूट कर विदेश भागने का दरवाजा खोल रखा है ! 70 साल के इतिहास में यदि देश की किस्मत भारतीय जनता पार्टी के हाथ में होती तो आज हमारे देश की स्थिति पाकिस्तान एवं बांग्लादेश से भी बदतर होती ! यह विचारधारा नहीं चाहती कि किसी तरह किसानों का भला हो कृषि क्षेत्र में कोई भी आधुनिक यंत्र आए ! किंतु राजीव गांधी ने तमाम विरोध के बावजूद आधुनिकरण की व्यवस्था को लाने का काम किया ! राजीव गांधी ने जब भारत में सूचना क्रांति की अलग जगाने के लिए कंप्यूटर एवं मोबाइल को ला रहे थे तब भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने खुलकर विरोध किया था ! सूचना क्रांति के आधुनिकरण पर विरोध करते हुए कह रहे थे कि इससे हमारी भारत की पुरातन संस्कृति को खतरा उत्पन्न हो जाएगा लेकिन राजीव गांधी ने तमाम विरोध के बावजूद देश में सूचना क्रांति की तकनीक के उपयोग को प्रतिस्थापित किया ! आज यदि हम यह सोचे कि उस समय यदि भारतीय जनता पार्टी का शासन होता तो आज भी भारत को सांप-सपेरों का देश बनाए रखते ! राजीव गांधी की आधुनिक सोची थी जो उस समय समाज की मुख्यधारा से वंचित लोगों एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए समाज के व्यक्तियों को शिक्षित करने के लिए गरीब के बच्चे बेहतर विद्यालय में पढ़ें ! उनके लिए नवोदय विद्यालय की स्थापना की ! उस समय नाथूराम गोडसे की विचारधारा के लोग ही शक्ति के बंटवारे का विरोध कर रहे थे ! राजीव जी ने पंचायती राज व्यवस्था कर उसे भी किया ! भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए राजीव ने बोफोर्स लाकर प्रतिस्थापित किया जिसका रूढ़िवादी परंपरा के लोगों ने बदनाम करने की साजिश रची ! यह वही विचारधारा है जो महिलाओं के आधुनिक परक एक जीवन शैली पर प्रश्नचिन्ह जिन उठाती रहती है ! यदि हम मोदी सरकार के 5 वर्षों की समीक्षा करें तो पाएंगे कि सरकार विकास के मुद्दे से भटक कर राजनीति गाय के नाम पर इंसानियत का कत्ल करने की रही है! लव जिहाद के नाम पर युवाओं के साथ मारपीट करने की रही है!
संस्कृति की रक्षा के नाम पर देश की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ एवं मारपीट करने की रही है ! दलित, आदिवासी,पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ छेड़छाड़ करने एवं उन्हें संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने की रही है ! सच में देखा जाए तो भले ही यह सरकार मुंह में राम बगल में छुरी की कहावत को चरितार्थ करती है ! सत्ता के सिंहासन पर बैठने के बाद मोदी सरकार ने देश में कई समस्याओं को जन्म दिया है! न जाने उन समस्याओं का खामियाजा कितने वर्षों बाद पूरा होगा यह कहना मुश्किल है ! दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के सह संयोजक डॉ अनिल कुमार ने कहा है कि यह सरकार देश की समस्याओं का समाधान करने के बजाय ऐसे मुद्दों पर देश के लोग लोगों का ध्यान भटकाने का काम करती है जो देश की भावनाओं से जुड़े हुए होते हैं ! किसी भी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर देश के लोगों में भाईचारे की भावना खत्म करके अंग्रेजों की तरह ‘फूट डालो और राज करो’ की रणनीति पर कार्य कर रही है ! देश के लोगों को इस राजनीतिक षड्यंत्र को समझने की आवश्यकता है ! जिस दिन लोगों में राजनीतिक षड्यंत्र को समझने की क्षमताएं विकसित हो जाएंगी उस दिन के बाद यह लोग देश की भावनाओं के साथ खेलने का कार्यक्रम बंद कर देंगे !




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