BREAKING NEWS -
Search




Corona

देश के कोने कोने में फंसे लोगों को बाहर निकालने का रेल किराया वहन करेगी कांग्रेस पार्टी

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा सोनिया गांधी ने देश के कोने कोने में फंसे लोगों का रेल किराया वाहन करने का निश्चय किया है | दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रभारी  डॉ. अनिल कुमार मीणा ने बताया कि जिन लोगों के कंधों पर देश के लोगों ने पूर्ण बहुमत के साथ जन सेवा करने की जिम्मेदारी सौंपी थी आज वे लोग जनता से मुख मोड़ चुके हैं | इस महामारी के दौर में देश के लोगों ने जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए जो खुलकर दान किया था उसको भी सरकार ने घोटाला करने के अनेक रास्ते निकालें| जिसका पहले नाम प्रधानमंत्री राहत कोष था| प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते थे तथा सरकारी ऑफिसर्स तथा विपक्ष के नेता मेंबर हुआ करते थे ताकि एक पैसे की धांधली ना हो पाए |  जिसमें  3800 करोड़ रूपए अभी भी है उसका कोई हिसाब नहीं| उसका नाम बदलकर पीएम केयर्स फंड कर दिया  गया जिसके अब  प्रधानमंत्री अध्यक्ष तथा राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण तथा अमित शाह सदस्य है| यह खाता भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के लिए खुला छोड़ दिया गया है जो आपकी इच्छा अनुसार कहीं पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं |

Coronavirusuptimes

Congress party will bear the rail fare

कोरॉना महामारी के लिए अभी तक का सरकार के पास अनुमान फंड  200000 दो लाख करोड रुपए है | देश के लोगों ने खुलकर दान किया लेकिन वह जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए नहीं पहुंच पाया | अभी तक ना तो ठीक से हॉस्पिटल बना है, ना सैनिटाइजर छिड़काव हुआ है, ना मस्क बांटे गए, नाही किट बांटे गए, नहीं गरीबों को सही से भोजन मिल पा रहा है तो आखिर ये पैसा का हो क्या  रहा है?  देश के इस पैसे को BJP सरकार किस लिए उपयोग करेगी ? डॉ अनिल मीणा ने कहा कि यह सवाल देश के प्रत्येक व्यक्ति के माध्यम से उठना चाहिए |

डॉ अनिल मीणा ने बताया कि श्रमिक व कामगार देश की रीढ़ की हड्डी हैं। उनकी मेहनत और कुर्बानी राष्ट्र निर्माण की नींव है। सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाऊन करने के कारण लाखों श्रमिक व कामगार घर वापस लौटने से वंचित हो गए। 1947 के बंटवारे के बाद देश ने पहली बार यह दिल दहलाने वाला मंजर देखा कि हजारों श्रमिक व कामगार सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल घर वापसी के लिए मजबूर हो गए। न राशन, न पैसा, न दवाई, न साधन, पर केवल अपने परिवार के पास वापस गांव पहुंचने की लगन। उनकी व्यथा सोचकर ही हर मन कांपा और फिर उनके दृढ़ निश्चय और संकल्प को हर भारतीय ने सराहा भी।

 

पर देश और सरकार का कर्तव्य क्या है? आज भी लाखों श्रमिक व कामगार पूरे देश के अलग अलग कोनों से घर वापस जाना चाहते हैं, पर न साधन है, और न पैसा। दुख की बात यह है कि भारत सरकार व रेल मंत्रालय इन मेहनतकशों से मुश्किल की इस घड़ी में रेल यात्रा का किराया वसूल रहे हैं।

श्रमिक व कामगार राष्ट्रनिर्माण के दूत हैं। जब हम विदेशों में फंसे भारतीयों को अपना कर्तव्य समझकर हवाई जहाजों से निशुल्क वापस लेकर आ सकते हैं, जब हम गुजरात के केवल एक कार्यक्रम में सरकारी खजाने से 100 करोड़ रु. ट्रांसपोर्ट व भोजन इत्यादि पर खर्च कर सकते हैं, जब रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री के कोरोना फंड में 151 करोड़ रु. दे सकता है, तो फिर तरक्की के इन ध्वजवाहकों को आपदा की इस घड़ी में निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मेहनतकश श्रमिकों व कामगारों की इस निशुल्क रेलयात्रा की मांग को बार बार उठाया है। दुर्भाग्य से न सरकार ने एक सुनी और न ही रेल मंत्रालय ने।

इसलिए, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे जरूरी कदम उठाएगी। मेहनतकशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने के मानव सेवा के इस संकल्प में कांग्रेस का यह योगदान होगा।

डॉ. अनिल कुमार

प्रभारी दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस

असिस्टेंट प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook